smart ideas shakti mishra

About

मेरे देश को सृजनशीलता के क्षेत्र में आगे बढ़ाते हुए भारतीय युवा शक्ति को मैं शुद्ध अन्तःकरण से प्रणाम्, अभिवादन और  नन्दन-वन्दन-अभिनन्दन करता हूँ। मेरे मित्रों, मुझे आप सभी को यह अवगत कराते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि स्मार्ट आइडियाज सिर्फ मेरे लिये मात्र एक बेवसाइट नहीं बल्कि जीवन का वह आदर्श सूत्र है जो समूचे भारतवर्ष के नौजवानों के लिये एक छोटी ही सही परन्तु आशा की किरण है। इसका कारण यह है कि जब कोई भी व्यक्ति हमारे इस बेवसाइट के माध्यम से रोजगार की दिशा में एक सार्थक कदम उठाता है तो मुझे यह एहसास होता है कि मेरा भगीरथ जैसा परिश्रम धीरे-धीरे रंग ला रहा है क्योंकि इसके माध्यम से जहाँ एक ओर एक व्यक्ति अपने पैरों पर आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा होता है वहीं दूसरी ओर उसके इस कदम से राष्ट्र निर्माण की दिशा में बढावा मिलता है। दोस्तों, स्मार्ट आइडियाज मेरे कठोर परिश्रम का वह आकर्षक परिणाम है जो मेरी आत्मा को संतुष्टि और दूसरो के होंठो पर आत्मनिर्भरता की मुस्कान को बिखेर देता है।

बात सन 2003 की है जब मैने अपने जीवन का प्रारम्भ सड़को के उस किनारे से किया था जिसे फुटपाथ कहते हैं। मित्रों, मैने सिर्फ गरीबी सुनी थी परन्तु मैने गरीबी की सीमा भी देखी है और गरीबी को बहुत नजदीक से महसूस भी किया है आज जबकि मै एक बिजनेस मैन हूँ तो मेरे खुद की आत्मा ने फैसला किया है कि मै सदैव ऐसे छोटे-छोटे व्यवसाय और लघु उद्योगों की तलाश करता रहूँगा जो कम पूँजी में शुरु किये जा सकते हैं और कुछ कर गुजरने की क्षमता रखने वाले व्यक्तियों के लिये सहायक सिद्ध हों। मैं इस बात से इनकार नही करता कि मेरी यह कोशिश पर्याप्त है किन्तु मेरा यह प्रयास डूबते को तिनके का सहारा जैसा कहा जा सकता है जो मेरे लिये यह संतुष्टि देने के लिये पर्याप्त है कि मेरी यह कोशिश मेरे देश के किसी नागरिक के लिये काम तो आयी। बहुत थोड़ा ही सही परन्तु राष्ट्र आगे तो बढ़ा, देश में बेरोजगारों की संख्या में मेरे द्वारा कमी तो की गयी।

मित्रों, हिन्दी के प्रसिद्ध कवि दुष्यन्त कुमार की ये पंक्तियाँ मुझे हमेशा प्रेरित करती रहीं हैं। अतः इन पंक्तियों को मै आपसे भी साझा करना चाहता हूँ, क्या पता इन पंक्तियों के माध्यम से कितने जीवन में उजाले और आशाओं की नई किरण फैल जाय-
“ हो गयी है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिये,
             इस हिमालय से कोई गंगा फिर निकलनी चाहिये
             सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नही,
             सारी कोशिश है कि सूरत बदलनी चाहिये।
             आज दीवार हिल उठी है परदे की तरह
             मगर शर्त ये थी कि बुनियाद हिलनी चाहिये,
             और मेरे सीने में ना सही तो तेरे सीने में सही
             हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिये।।”
दोस्तों,
गरीबी और बेरोजगारी का दंश इतना घातक होता है कि जो अनमोल समय हमें अपनो के बीच में, माँ, बाबूजी, भैया, भाभी, बहने, दादा, दादी और पत्नी, बच्चे और यार दोस्तों के साथ बिताना चाहिये वह समय हम दूर देशों में शहरों में, सड़कों पर, रोजगार की तलाश में धूल फाँकते हुए बिता देते हैं और सड़को पर धूल फाँकने का अनुभव कितना दुखदायी और मर्मभेदक होता है, इससे मैं भली-भाँति परिचित हूँ। इसलिये यह मेरी कोशिश है कि लोग अपने निकट स्थानो पर अपने गाँव में अपने कस्बों में ही अपनी आजीविका चला सकें। अपने छोटे-छोटे लघु उद्योग विकसित कर सकें। जिससे शहरों, विदेशों की तरफ पलायन करने की नौबत ना आये। मै उस पीड़ा से भी भली-भाँति रुबरु हुआ हूँ जिसमें कोई व्यक्ति रोजी-रोटी की तलाश में बहुत दूर होता है और घर पर किसी प्रिय व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और विडम्बना तो देखिये कि वह दुर्भाग्यशाली व्यक्ति उस व्यक्ति के अन्तिम दर्शन भी नही कर सकता है। उसके दिल पर क्या बीतेगी, जीवन भर यह कसक उसके कलेजे को टीसेगी, उस दर्द का बयान क्या शब्दों के माध्यम से व्यक्त किया जा सकता है परन्तु ऐसी परिस्थिति से मैं स्वयं गुजरा हूँ। सन 2007 में जब मेरी माता जी का देहावसान हो गया तो इसी रोजी-रोटी के चक्कर में पलायन के कारण मैं अपनी जन्मदात्री के उस ममतामयी मुख का अन्तिम झलक भी न पा सका जिसे फिर जीवन में मै कभी नही देख सकता था। दुर्भाग्य की इन गहराईयों को किसी पैमाने से मापा जा सकता है?, यह एक ऐसी वेदना थी जिसने मेरे अंतस् को अन्दर तक झकझोर दिया और इन्हीं विपरीत परिस्थितियों में मैने यह निर्णय लिया कि मैं उन व्यक्तियों के लिये कार्य करुँगा जो गरीबी के हाथों लाचार हैं, कुछ करना चाहते हैं परन्तु पैसे की समस्या सुरसा की तरह मुँह बाये सामने खड़ी हो जाती है। बच्चे भूख से न मरें, परिवार के जन आर्थिक बदहाली के शिकार न हों, दादा-परदादा से विरासत में मिली हुई तीन हाथ जमीन भी गिरवी न रखनी पड़े, इसके लिये जो लोग शहरों में भाग-भाग कर औने-पौने दाम पर काम करना शुरु करते हैं, उनके लिये कुछ करना चाहता हूँ, साथ ही साथ देश मे बढ़ रही बेरोजगारों की फौज के हाथ में अपने इस बेवसाइट के माध्यम से रोजगार का हथियार पकड़ाना ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य है।

मित्रों,
अन्धकार को कोसने से ज्यादा अच्छा है कि प्रकाश की एक किरण प्रज्ज्वलित की जाय, इसलिये भारत की युवाशक्ति को प्रगति की राह पर अग्रसर करने के लिये, राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिये, हृदयस्थ संकल्प को मूर्त रुप प्रदान करने के लिये और भारत में बेकारी की समस्या को कम करने के लिये मैं देश भर में जगह-जगह, स्थान-स्थान भ्रमण करता रहता हूँ और ऐसे छोटे-छोटे व्यवसायों, लघु उद्योगों जैसे कपूर बनाने का उद्योग, अगरबत्ती बनाने का उद्योग, मोमबत्ती बनाने का उद्योग, कलम बनाने का उद्योग, लोहे की कील बनाने का उद्योग, डिटर्जेन्ट पाउडर बनाने का उद्योग, जूता एवं चप्पल बनाने का उद्योग आदि व्यवसायों को बड़ी सावधानी व परिश्रम पूर्वक तलाश करता रहता हूँ, बमुश्किल उन व्यवसायों और लघु उद्योगों की तकनीकी जानकारी इकट्ठा करता रहता हूँ जो बहुत कम पूँजी में किसी भी स्थान पर स्थापित किये जा सकें और एक व्यक्ति को आर्थिक एवं सामाजिक रुप से समर्थ, सक्षम और सम्पन्न बना सकें साथ ही साथ दूसरे लोगों को भी इस बात के लिये प्रेरित कर सकें कि यदि मैं सफल हो सकता हूँ तो आप भी सफल हो सकते हो।

आज यह बताते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है कि यूट्यूब पर स्मार्ट आइडियाज चैनल के माध्यम से लगभग नौ लाख लोग लाभान्वित हो रहें हैं जिसमें से 25000 से ज्यादा लोग खुद का व्यापार शुरु करके आत्मनिर्भर बन चुके हैं जबकि वह भी एक दिन था जब चैनल शुरु करते समय मै अकेला था परन्तु ईश्वर की कृपा से, अपने माता-पिता के आशीर्वाद से और आप सभी दोस्तों के प्रोत्साहन से मेरा हौसला दिन दूना रात चौगुना बढ़ता ही जा रहा है। यह कुछ वैसे ही है जैसे- मै अकेला चला था जानिबे मंजिल मगर, लोग मिलते गये और कारवाँ बनता गया।

मित्रों, आशा है कि मेरी यह छोटी सी कोशिश आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का संचार करेगी, मानवीय मूल्यों को समझने में सहायक सिद्ध होगी और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक अनूठी पहल का कार्य करेगी जो किसी भी राष्ट्र के प्रगति का पहला सोपान मानी जाती है।

आप सभी लोगों को मैं धन्यवाद देते हुए यह आशा रखता हूँ कि आप सभी लोगों के सुझाव हमकों सदैव मिलते रहेंगे और हम सभी मिलकर अपने देश को फिर से उसी मुकाम पर प्रतिष्ठित कर सकेंगे जहाँ पर वह सही मायनों में विश्वगुरु कहलाता है।
स्मार्ट आइडिया का यही एक मात्र लक्ष्य है।
जय हिन्द।