Manufacturing business idea

Incense Stick अगरबत्ती Making Process, Machine & Raw Material

Written by Shakti Mishra

अगरबत्ती बनाने का बिजनेस Incense Stick Making Machine & Raw Material


अगरबत्ती एक ऐसी वस्तु है जो हर घर में, हर धर्म में हर धार्मिक स्थान पर, हर धार्मिक अनुष्ठान में किसी भी प्रकार के पूजा पाठ में या मच्छरों को भगाने में दुर्गन्ध को समाप्त करने में प्रयोग की जाती है अगर बत्ती से उठने वाला धुँवा आसपास के वातावरण को सुगन्धित बना देता है तथा आसपास के लोग आपके प्रति अच्छा व्यवहार करने का प्रयत्न करते हैं।

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अगरबत्ती का बिजनेस कैसे प्रारम्भ करें, इसके लिये कच्चा माल कहाँ से मगाँये, इस बिजनेस को करने में कितनी पूँजी लगेगी, इसे करने में कितने आदमी की आवश्यकता पड़ेगी, यह बाजार में कैसे बिकेगा, कितना मुनाफा होगा आदि सम्पूर्ण जानकारी के लिये इस लेख को आगे पढ़ते जायें।

अगरबत्ती बनाने के लिये कच्चा मालः- Raw Material

अगरबत्ती बनाने के लिए हमें जो रॉ मैटेरियल की आवश्यकता पड़ती है उसे हम अगरबत्ती प्रेमिक्स के नाम से जानते हैं। यह जो अगरबत्ती प्रेमिक्स है उसके अंदर चारकोल पाउडर, लकड़ी का पाउडर, गुड़ पाउडर को अच्छे तरीके से मिला कर बनाया जाता है,  यह पाउडर बाजार में आसानी से व सस्ते दाम पर उपलब्ध हो जाता है। इसके अतिरिक्त अगर की लकड़ी (छड़ी) खुशबूदार परफ्यूम, डी0ई0पी0 लिक्विड, प्रीमिक्स पाउडर को पानी के साथ गूँथने हेतु अपनी सुविधानुसार प्लास्टिक अथवा किसी अन्य धातु का परात या टब, पैकिंग के लिये पालीथीन आदि प्रमुख वस्तुओं की आवश्यकता होती है।

अगरबत्ती निर्माण हेतु कच्चे माल को तैयार करने की प्रक्रियाः-
अगरबत्ती निर्माण हेतु कच्चे माल को तैयार करने की प्रक्रिया चरण दर चरण निम्नलिखित ढंग से होती है।
यदि हम एक किलो कच्चा माल तैयार करने की प्रक्रिया से गुजरते हैं तो-

सबसे पहले इस 1 किलोग्राम प्रेमिक्स पाउडर में 650 ग्राम पानी मिलाया जाता है। पानी मिलाने के बाद पाउडर और पानी को अच्छे तरीके से उस प्रकार मिला लिया जाता है जैसे घरों में महिलाएँ आँटा गूथकर तैयार कर देती हैं। इस तरह से आपका रॉ मैटेरियल बन कर तैयार हो जाता है।

अगरबत्ती निर्माण हेतु आवश्यक मशीनरी एवं उपकरणः- Incense Stick Making Machine & Important Tips.

अगरबत्ती बनाने की मशीन का लागत मूल्य बाजार में लगभग 65000 रुपये है। यह मशीन फुली आटोमेटिक होती है और इसकी संचालन प्रक्रिया अत्यन्त सरल और सुविधाजनक होती है। इसमें व्यक्ति का नाम मात्र का परिश्रम लगता है।
बनी हुई अगरबत्ती को इकट्ठा करने के लिये प्लास्टिक के कैरेट की भी आवश्यकता पड़ती है।

अगरबत्ती निर्माण करने की सम्पूर्ण प्रक्रियाः-

  1. सबसे पहले अगरबत्ती बनने के लिये तैयार प्रीमिक्स पाउडर को मशीन के ऊपर बने हुए निर्धारित डोंगे उस प्रकार डाल देते हैं जिस प्रकार आटा चक्की पर गेंहूँ को डोंगे में डाल दिया जाता है।इसके पश्चात् मशीन के निचले हिस्से में अगर की छड़ी के बण्डल को निर्धारित स्थान पर सेट कर देते हैं और साथ ही साथ यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि छड़ी सही ढंग से सुव्यवस्थित है या नहीं।अब मशीन के पावर स्विच को आन कर देते हैं इसमें उतनी ही बिजली की आवश्यकता होती है जितनी की किसी भी घरेलू उपकरण को चलाने में पड़ती है।
    मशीन को आप अपनी सुविधानुसार धीमी गति से, मध्यम गति से अथवा तीव्र गति से संचालित कर सकते हैं। इसके लिये मशीन में हाइड्रोलिक लगा होता है जो आवश्यकता के अनुरुप मशीन की गति को नियन्त्रित कर देता है।
  2. अब मशीन के द्वारा अगर की लकड़ी पर अगरबत्ती प्रेमिक्स की परत चढ़ा दी जाती है। बनी हुई अगरबत्तियों को कुछ इस प्रकार से एकत्रित करते हैं कि अगरबत्ती का निचला सिरा एक तरफ तथा प्रीमिक्स लगा हुआ हिस्सा एक तरफ रहे।
  3. इसका लाभ यह है कि अगरबत्तियाँ बेतरतीब नही होती और उनकी पैकिंग में सुविधा और सहुलियत मिल जाती है। ऐसा न करने पर अगरबत्तियों के तितर-बितर होने की सम्भावना बढ़ जाती है जिसके फलस्वरुप अगरबत्तियों को सहेजने में व्यर्थ का परिश्रम व समय खर्च होता है।
  4. एक किलो अगरबत्ती प्रेमिक्स को अगरबत्ती का रुप देने के लिये 360  ग्राम अगर की लकड़ी (छड़ी) की जरूरत पड़ती है। इस फुली आटोमेटिक मशीन के द्वारा एक दिन में 90  से 100  किलो गीली अगरबत्ती बनायी जा सकती है।
  5. अगरबत्ती बन जाने के बाद इसे कुछ समय तक सूखने देते हैं। सूखने के क्रम में आप पंखे की हवा या खुली हुई खिड़कियों के सामने, जिससे हवा सुचारु रुप से आती जाती हो की सहायता ली जाती है।
  6. अगरबत्तियाँ एक दूसरे से चिपके न इसके लिये किसी लम्बी-चौड़ी चादर या प्लास्टिक पर कतार से पतली परत में बिछा देते हैं। निर्मित अगरबत्तियों को भूलकर भी धूप में न सुखायें अन्यथा सूखकर प्रीमिक्स पाउडर के झड़ जाने की आशंका रहती है। सूख जाने के बाद बनी हुई अगरबत्ती 65 से 70 किलो तक बचती है।
  7. अगरबत्ती सूख जाने के बाद इसका बण्डल बना लेते हैं। 1 किलो परफ्यूम में 4 किलो DEP लिक्विड मिक्स किया जाता है इस तरह परफ्यूम को बना लिया जाता है इस परफ्यूम के बने हुए घोल में अगरबत्तियों के बण्डल को डुबाकर निकाल लेते हैं और परफ्यूम के टब के ऊपर किसी ऐसे स्थान पर रखते हैं जहाँ से अगरबत्तियों के बण्डल से परफ्यूम टपक-टपक कर टब में ही गिरता रहे।
  8. इस प्रक्रिया के बाद परफ्यूम की सुगन्ध अगरबत्ती के अन्दर समा जाती है। परफ्यूम की लेयर चढ जाने के बाद  अगरबत्ती का वजन 90 किलोग्राम हो जाता है। इस निर्मित 90 किलो अगरबत्ती पर 30  से 40 %  तक मुनाफा कमाया जा सकता है.

    बनी हुई अगरबत्ती को पैकिंग के लिये साधारण पालीथीन या अपनी पसन्द के पालीथीन का प्रयोग किया जा सकता है।

स्मार्ट आइडियाः-

इस प्रकार के लघु एवं कुटीर उद्योग स्थापित करके सर्वप्रथम आप स्वयं को आत्मनिर्भर बना सकते हैं साथ ही साथ अपने देश में बढ़ रही बेरोजगारी को अपने इस छोटे से कदम के द्वारा थामने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसा हम इसलिये कह रहे हैं कि बूँद-बूँद से ही घड़ा भरता है। इस तरह के व्यवसाय के माध्यम से आप अन्य लोगों को भी अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दे सकते हैं साथ ही साथ उनको यह व्यवसाय करने के लिये प्रेरित भी कर सकते हैं जो मेक इन इण्डिया को सफल बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

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About the author

Shakti Mishra

Shakti Mishra is a business man by profession, YouTuber by passion and a blogger. He was homeless staying on footpath of Bangalore city. After success in business, he has started working for unemployed people in his country to create more jobs & provide business ideas to people.

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