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Slipper Making Business In Hindi हवाई चप्पल उद्योग सुरु करने की जानकारी

hawai chappal machine
Written by Shakti Mishra

हवाई चप्पल ज़माने से चला आ रहा एक ऐसा बिज़नेस है जिसकी मांग कभी ख़त्म नहीं होगी। हवाई चप्पल हर इंसान प्रयोग करता है चाहे वो आमिर हो या गरीब इसीलिए इसकी मांग हमेशा बाजार में बनी रहती है. वक़्त के साथ इसकी डिज़ाइन में बदलाव किये जाते हैं. जैसे आज कल प्रिंटेड हवाई चप्पल बाजार में खूब बिकते हैं. हवाई चप्पल अन्य चप्पल के तुलना में सस्ती होती है तथा इसे बनाने का खर्च भी कम आता है.हवाई चप्पल बनाने का उद्योग हर जगह किया जा सकता है, क्यों की हवाई चप्पल गाओं एवं शहरों दोनों स्थानों पर प्रयोग में लाया जाता है. इस ब्लॉग में मैं हवाई चप्पल के उद्योग के बारे में आपको सारी जानकारी दूंगा जैसे : इसमें लगने वाली मसिनें एवं सामग्री. मशीन एवं सामग्री कहाँ मिलेगा इसकी जानकारी साथ ही साथ चप्पल बनाने में आने वाला खर्च। सारी जानकारी इस लेख में आपको मिल जाएगी।

हवाई चप्पल बनाने का तरीका

सबसे पहले मशीन की मदत से रबर के सीट को साइज के हिसाब से काट लिया जाता है, इसके बाद ग्राइंडर की मदत से शोल के चारो और समतल कर दिया जाता है. शोल के बहरी हिस्से को समतल कर लेने के बाद स्क्रीन प्रिंटिंग की जाती है ( स्क्रीन प्रिंटिंग ऑप्शनल है) इसके बाद सोल को सूखा लिया जाता है, जैसे ही सोल सुख जाता है एक ड्रिल मशीन के द्वारा इसमें 3 छेद कर दिए जाते हैं और स्ट्रिप मशीन की मदत से स्ट्रिप को सोल में लगा दिया जाता है. इसकी पैकेजिंग कर बाजार में बिकने के लिए भेज दिया जाता है.

hawai chappal machine

आईये अब जानते हैं पूरा प्रकरण विस्तार से

1. रजिस्ट्रेशन

किसी भी व्यवसाय को शुरू करने से पहले हमें उसकी जरुरी रजिस्ट्रेशन करवा लेना चाहिए ताकि भविष्य में आने वाली समस्याओं से बचा जा सके एवं सरकारी नियमों के मुताबिक हमें हर व्यवसाय को करने से पहले ही इसकी रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है.
हवाई चप्पल बनाने का उद्योग के लिए रजिस्ट्रेशन निम्न हैं :-

  • उद्योग आधार में पंजीकरण।

उद्योग आधार में पंजीकरण आसान है तथा ऑनलाइन इंटरनेट के माध्यम से इसकी रजिस्ट्रेशन की जा सकती है तथा यह निःशुल्क है. udyogaadhaar.gov.in/ पर आप कुछ ही मिनटों में इसकी रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं

  • GST Registration

गुड्स अवं सर्विस टैक्स रजिस्ट्रेशन आप ऑनलाइन करवा सकते हैं तथा किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदत से इसकी रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है. https://reg.gst.gov.in/registration/

  • Shop Act Licence Or No Objection Certificate

अगर आप शहर में निवासित हैं तो शॉप एक्ट लाइसेंस और अगर रूरल क्षेत्र में हैं तो आपके ग्राम पंचायत से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट प्राप्त करें. अगर आपको रजिस्ट्रेशन में परेशानी हो रही हो तो किसी चार्टेड अकाउंटेंट की सहायता लें.

हवाई चप्पल के उद्योग में काम आने वाले उपकरण

  • Hawai chappal sole cutting machine हवाई चप्पल सोल कटाई मशीन 

hawai chappal sole cutting machine

यह मशीन बाजार में आसानी से उपलब्ध है तथा यह मशीन लगभग 1 लाख रुपये की लागत में मिल जाती है, यह मशीन रबर की सीट को die की मदत से साइज के अनुरूप काट देता है. इस मशीन को किसी भी तरह के हवाई चप्पल बनाने के काम में लाया जा सकता है. साथ ही साथ यह मशीन एक फेज या ३ फेज बिजली पर चलाया जा सकता है

  • ग्राइंडिंग मशीन  Grinding Machine 

hawai chappal grinding
ग्राइंडिंग मशीन की मदत से कटे हुए सोल के बहरी भागों को हल्का हल्का घिस कर समतल कर लिया जाता है इस से चप्पल का लुक अच्छा दीखता है. यह मशीन भी ३ फेज या १ फेज घरेलु बिजली पर चलाया जा सकता है.इस मशीन की ला गत 6 हजार से 8 हजार के करीब अता है

  • स्क्रीन प्रिंटिंग Screen Printing 

hawai chappal screen printing
स्क्रीन प्रिंटिंग की मदत से आप जैसा चाहें सोल के ऊपरी भाग पर डिज़ाइन उकेर सकते हैं, इसका प्रयोग करना या न करना आपके ऊपर निर्भर करता है.तथा इसकी लागत 2 हजार रुपये के करीब आता है.

  • ड्रिल मशीन dril machine

slipper drill machine

ड्रिल मशीन का उपयोग चप्पल के शोल पर स्ट्रैप लगाने के लिए होल करने हेतु किया जाता है, यहाँ पर अवगत करवा दूँ की जब आप शोल की कटाई करते हैं तभी उसमे लगा हुआ die 3 छोटा छेद कर देता है, बाद में ड्रिल मशीन की मदत से उन छिद्रों को बड़ा कर दिया जाता है जिसमें हम चप्पल की स्ट्राप लगा सकते हैं. तथा इस मशीन की कीमत 14 हजार के आस पास आता है.

  • Strap Machine  स्ट्राप मशीन

slipper drill machine

स्ट्राप मशीन एक मैनुअल मशीन है जिसकी मदत से सोल पर स्ट्राप को लगा दिया जाता है, इस मशीन की लागत 5 हजार रुपये के आस पास अता है.

  • 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 No. Die 

slipper die

DIE का काम शोल काटने के लिए किया जाता है, यह अलग अलग साइज का अाता है इसकी मदत से चप्पल के साइज का शोल काटा जाता है इसकी कीमत 400 से 620 रुपये तक आता है.

चप्पल बनाने के लिए रॉ मटेरिअल

  • हवाई चप्पल बनाने के लिए मुख्यतः 2 तरह के रॉ मटेरियल का उपयोग किया जाता है
    पहला : रबर की शीट : जिसकी कीमत 300 से सुरु होता है, 1 शीट में 18 चप्पल बनाया जा सकता है
    दूसरा : स्ट्रैप्स – जिसे हवाई चप्पल के ऊपर तीन छेदों पर लगाया जाता है तथा इसकी कीमत लगभग 3 रुपये प्रति आता है1 चप्पल बनाने का खर्च अनुमानित 25 रुपये आता है जिसका बाजार भाव 80 रुपये तथा होलसेल भाव 50 रुपये तक होता है. अतः हम ये कह सकते हैं की हवाई चप्पल के उद्योग में 30 से 50 % तक मुनाफा कमाया जा सकता है.नोट : यह बिज़नेस आईडिया सिर्फ एजुकेशन पर्पस से बनाया गया है, रेट का अनुमान मेरे पर्सनल रिसर्च पर आधारित है.

hawi chappalmaking sheet

 

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हवाई चप्पल बनाने का व्यवसाय

हवाई चप्पल का व्यवसाय एक ऐसा व्यवसाय है जो व्यक्ति को बहुत ही कम समय में, कम लागत में अधिक से अधिक आमदनी करा सकता है। साथ ही साथ इस व्यवसाय में घाटा नही के बराबर होता है। इस व्यवसाय का प्रारम्भ करके व्यक्ति अपने पैरो पर आत्मनिर्भर हो सकता है और अन्य लोगों को भी इस व्यवसाय से जोड़ते हुए उनकी भी रोजी रोटी का जुगाड़ कर सकता है। हवाई चप्पल का व्यवसाय शुरु करने के लिये, इससे मुनाफा कमाने के लिये और सफलता की नयी ऊँचाईयों को छूने के लिये इस लेख को सावधानीपूर्वक विस्तार से पढ़े।

hawaichappal business hindi
समाज में हवाई चप्पल की आवश्यकता एवं उपयोगिताः-

हवाई चप्पल एक ऐसा घरेलू संसाधन है जो प्रत्येक घर में प्रत्येक सदस्य द्वारा हर समय इस्तेमाल किया जाता है। बालक वृद्ध महिलायें युवा सभी के सभी इसकी सेवाओं के मोहताज होते हैं। इसको पहनने में जहाँ व्यक्ति को सुविधा व सहुलियत होती है साथ ही साथ इसका प्रयोग आरामदेह व सरल है। इसका कारण यह है कि बहुत कम कीमत पर यह आसानी से प्राप्त हो जाता है, टिकाऊ होता है और कहीं भी किसी भी समय इसका प्रयोग किया जा सकता है। इसके बारे में लोगों में यह तथ्य बड़ा मशहूर है कि सोना से कम नही और खो जाये तो गम नहीं। समाज का कोई भी वर्ग चाहे वह अमीर हो, गरीब हो, ठेला चालक हो, दुकानदार हो, सब्जी बेचने वाला हो, घर मे इधर-उधर भाग-दौड़ करती महिलाएं हों, यहाँ तक कि कुछ घरों में शौचालय में जाने के लिये अलग से हवाई चप्पल रख दिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह शाम खेतों की निगरानी करने हेतु जाते समय लोगों के द्वारा बहुतायत हवाई चप्पलों का प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद के क्षेत्र में यदि देखा जाय तो हवाई चप्पल की उपयोगिता अपने आप सिद्ध हो जाती है जिन व्यक्तियों को आँखों में जलन, कम रोशनी की समस्या होती है उसके लिये आयुर्वेद यह कहता है कि नंगे पाँव हरी दूब जिस पर ओस गिरी हुई हो चलें इसके लिये लोग बड़ी आसानी से हवाई चप्पल पहनकर जाते हैं और वहाँ चप्पल निकाल के उस पर चला करते हैं जबकि अन्य संसाधनों को पहनने में लोगों को एक प्रकार की झंझट महसूस होती है। हवाई चप्पल पहनने से यह भी लाभ है कि हाथ पैर धुलते समय यह बड़ा कारगर सिद्ध होता है। कुल मिलाकर यह देखा जाय तो हम पायेंगे कि हवाई चप्पल का कारोबार लाभ एवं खपत की दृष्टि से बहुत उपयोगी है क्योंकि जितनी मात्रा में इसका उत्पादन होता है उससे कही अधिक मात्रा में इसकी खपत होती रहती है।

हवाई चप्पल बनाने के लिये कच्चा माल (रा मैटेरियल) एवं आवश्यक मशीनरीः-

हवाई चप्पल का निर्माण करने के लिये हमें निम्नलिखित संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है-
1- चप्पल बनाने की रबर सोल सीट,
2- फीता (स्ट्रिप)
3- स्क्रीन प्रिन्टर मशीन,
4- रबर सोल कटर मशीन,
5- ड्रिल मशीन,
6- ग्राइन्डर मशीन,
7- स्ट्रिप फँसाने की मशीन,
8- विभिन्न साईज के लोहे की डाई,
9- चप्पल पैकिंग के लिये पालीथीन व मोटे कागज के डिब्बे,
10- रंगने के लिये पेन्ट।
hawai chappal

हवाई चप्पल बनाने की विधि एवं प्रक्रियाः-

हवाई चप्पल बनाने की प्रक्रिया में हमें सबसे पहले रबर शीट को सावधानी से उठाकर सोल कटर मशीन के नीचे निर्धारित स्थान पर इस प्रकार रख देते हैं कि रबर सोल कम से कम बाहरी किनारे की तरफ निकला रहे उसके बाद जिन-जिन नम्बर साईजों के सोल की आवश्यकता हो उस-उस नम्बर की डाई लेकर के रबरशीट के ऊपर हाथ से लगाते चले जाते हैं और मशीन को पैरों के द्वारा दबा-दबाकर अपेक्षित आकार के सोल की कटाई करते चले जाते हैं। रबर सोल कटर मशीन एक ऐसी मशीन है जो घरेलू बिजली से आसानी से चलाई जा सकती है। इसके संचालन में एक फेज या तीन फेज बिजली की आवश्यकता पड़ती है। अपनी सुविधा और क्षमतानुसार इसका सरलता से उपयोग किया जा सकता है।

कटे हुए रबरसोल के खुरदरे किनारों को चिकना करने हेतु ग्राइंडर मशीन पर ले जाते हैं और ध्यान से देखते हुए रबर सोल को चारो तरफ इस तरह से ग्राइन्डर मशीर पर हल्के हाथ से रगड़ते हैं कि सोल चौतरफा चिकना हो जाय इसके बाद चप्पलों को रंगने हेतु स्क्रीन प्रिंटर मशीन की सहायता लेते हैं इसके लिये चिकने हुए रबर सोल को स्क्रीन प्रिंटर के नीचे रखकर ऊपर से पेन्ट गिराकर अपेक्षित रंग देते हैं। इसके बाद पेन्ट से रंगे हुए कटिंग रबर सोल को थोड़ी देर सूखने के लिये छोड़ देते हैं। सुखाने के क्रम में सूर्य का प्रकाश न लगे इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखते हैं ताकि रंगो की चमक फीकी पड़ने की सम्भावना न रह जाय। सूखने के लिये पंखे की हवा या छाँव ज्यादा सही होती है।

फिर ड्रिल मशीन की सहायता से निर्धारित स्थानों पर रबर सोल को उलट-पलट कर छेद कर देते हैं और स्ट्रिप फँसाने वाली मशीन के पास ले जाकर स्ट्रिप फँसाने का कार्य बड़ी सावधानी व तन्मयतापूर्वक करते हैं स्ट्रिप फँसाने वाली मशीन एक मैनुअल मशीन होती है जिसको चलानें में बिजली की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती है।

मशीनरी की लागत एवं खर्चः-
चप्पल का कारोबार करने कि लिये जिन मशीनों की आवश्यकता पड़ती है, उनमें सबसे कीमती मशीन रबर सोल कटर मशीन होती है जिसका लागत मूल्य लगभग एक लाख दस हजार रुपये पड़ता है तथा अन्य मशीनरी चालीस से पचास हजार रुपये में खरीदी जा सकती है।
कच्चे माल की लागत एवं खर्चः-
हवाई चप्पल का कारोबार शुरु करने के लिये जैसा कि हम सभी जानते हैं कि इसके लिये हमे कच्चे माल की आवश्यकता होती है जो रबर सोल शीट के रुप में स्थानीय बाजारों में अथवा गूगल पर सर्च करके इन्टरनेट के माध्यम से रबर सोल शीट निर्माण करने वाली कम्पनियों से सीधे आनलाईऩ खरीददारी की जा सकती है जो काफी सस्ती व फायदेमन्द जान पड़ती है। यदि हम कुल मिलाकर सभी प्रकार के कच्चे माल की खरीददारी लगभग पचास हजार रुपये में करते हैं तो सारी मशीनरी एवं कच्चे माल की कुल लागत लगभग दो लाख रुपये के आसपास ठहरती है जो इस व्यवसाय को शुरु करने के लिये पर्याप्त है।

कानूनी प्रक्रिया एवं स्थान का चुनावः-

कोई भी व्यवसाय शुरु करने से पहले बुद्धिमान व्यक्ति उस व्यवसाय से सम्बन्धित सारी विधिक प्रक्रियाओं को भली-भाँति पूरा कर लेता है जिससे व्यवसाय प्रारम्भ करने पर किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।
इसके लिये यह आवश्यक है कि उद्योग आधार में अपने व्यवसाय का पंजीकरण करा लें। इसका पंजीयन आनलाईन होता है एवं निःशुल्क होता है। इसके साथ ही साथ वस्तु एवं सेवा कर (जी0 एस0 टी0) में भी पंजीयन करा लें।
अपने व्यवसाय के नाम की पक्की रसीद अवश्य बनवा लें।
चप्पल के व्यवसाय को शुरु करने के लिये आप अपने सामर्थ्य के अनुसार छोटे अथवा बड़े कमरे या बरामदे (हाल) का चुनाव कर सकते हैं फिर आवश्यकतानुसार व्यवसाय को बढाने के क्रम में स्थान का आकार प्रकार उसी अनुपात में बढ़ाते चले जाते हैं।

स्मार्ट आइडियाः- दोस्तों, कुछ कर गुजरने के लिये परिश्रम और हौसले की बड़ी जरुरत होती है बिना कुछ किये तो साँस भी अन्दर जाने से कतराती है। आज आवश्यकता इस बात की है कि दूर देशों में नौकरियों की तलाश में भटकने के बजाय अपने देश, अपने लोगों के बीच रहकर कुछ ऐसा किया जाय जिससे अपनी आजीविका बड़ी सुगमता से चलायी जा सके और दूसरों को भी इस बात के लिये प्रेरित किया जा सके। जिस प्रकार गोताखोर अथाह समुद्र में गोता लगाकर मोती निकाल लाते हैं जबकि किनारे पर बैठने वाले लोग हाथ पर हाथ धरे रह जाते हैं। मेरे कहने के मतलब यह है कि जब तक व्यक्ति किसी भी कार्य को करने के लिये तत्पर नही होगा तब तक सफलता उसके हाथ नही लगने वाली।

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About the author

Shakti Mishra

Shakti Mishra is a business man by profession, YouTuber by passion and a blogger. He was homeless staying on footpath of Bangalore city. After success in business, he has started working for unemployed people in his country to create more jobs & provide business ideas to people.

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