सेवईं एवं नूडल्स मेंकिंग बिजनेस Noodles Making Business

सेवईं एवं नूडल्स मेंकिंग बिजनेस Noodles Making Business

दोस्तों, आज हम एक ऐसे बिजनेस के बारे में चर्चा करेंगे जिसमें लागत भी नही के बराबर, जगह की जरुरत भी नही के बराबर और न ही किसी सहायक की आवश्यकता आप चाहें तो इस व्यवसाय को अपने परिवार के सदस्य़ों के साथ घर पर बडे आराम से शुरु कर सकते हैं, विधिवत चला सकते हैं और बैठे बिठाये अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं। दोस्तों इस व्यवसाय का नाम सेवईं एवं नूडल्स मेंकिंग बिजनेस है जिसे आप महज 30000 रुपये में अपने घर के किसी कमरे में, घर के आंगन में अथवा घर के पिछवाडे जहाँ भी चाहें जब चाहें जैसे चाहें शुरु कर सकते हैं। इस लेख के माध्यम से हम आपको बतायेंगे कि इस व्यवसाय को शुरु करने के लिये किन-किन वस्तुओं की मूलभूत आवश्यकता पड़ती है। अतः आपसे अनुरोध है कि इस लेख को बहुत ध्यान से पढ़े और उसके अनुसार अपने व्यवसाय की शुरुआत करें।

सेवईं एवं नूडल्स की आज के समाज में उपयोगिता एवं आवश्यकताः-

दोस्तों, यह बात हर कोई जानता है कि हमारा भारत त्यौहारों के देश के रुप में भी विख्यात है। इस देश में कोई ऐसा महीना नहीं जिसमें हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध जैन आदि धर्म के लोगों का त्यौहार न पड़ता हो जिनमें कुछ त्यौहार तो ऐसे हैं जिनमें सेवईं का बनना अनिवार्य माना जाता है जैसे- हमारे मुसलमान भाईयों का ईद का त्यौहार, साथ ही साथ हिन्दुओं के त्यौहारों में भी सेवईंयाँ बनने का प्रचलन मिलता है।

इसके अलावा आजकल भाग-दौड़ के युग में लोगों का रुझान फास्ट फूडों की तरफ बढ़ा है लोग खास तौर से बच्चे, युवा वर्ग और बड़ी भारी संख्या में महिलाएँ बड़ी तेजी से चाऊमीन की तरफ आकर्षित हुई हैं आप स्वयं भी जब बाजारों का रुख करते होंगे तो चाऊमीन के दुकानो पर, सड़कों के किनारे खड़े ठेलों पर, आयोजित मेलों में हाथ में तश्तरियों का बोझ उठाये हुए इन लोगों को बड़ी आसानी से चाऊमीन का जायका लेते हुए देखा जा सकता है। आजकल आधुनिकता और फैशन के परिवेश में घरों में ब्रेकफास्ट के तौर पर नूडल्स से बने हुए अनेक तरह के खाद्य पदार्थ धड़ल्ले से परोसे जा रहे हैं और काफी पसन्द भी किये जा रहे हैं। यदि शादी, समारोह, जन्मदिन एवं पार्टियों की बात करें तो वहाँ पर भी नूडल्स से बने हुए ब्यंजनों की काफी खपत होती है। कुल मिलाकर देखा जाय तो हम पायेंगे कि सेवईं एवं नूडल्स के कारोबार में नाम मात्र का भी नुकसान नही दिखाई देता है और साथ ही साथ यह भी निष्कर्ष निकलता है कि समाज में इसकी मांग व खपत दिन दूना रात चौगुना बढ़ती ही जा रही है। अतः इस व्यवसाय को प्रारम्भ करके घर से ही अच्छी खासी कमाई की जा सकती है और आत्मनिर्भर बना जा सकता है।

सेवईं एवं नूडल्स बनाने के लिये आवश्यक कच्चा माल एवं मशीनरी

1- सेवईं एवं नूडल्स बनाने वाली मशीन
2- विभिन्न साईज की डाई
3- बकेट
4- सबसे छोटे दाने वाली रवा (नूडल्स के लिये मायदा)
5- काटने के लिये कैंची
6- सेवईं व नूडल्स को पैक करने के लिये विभिन्न आकार के मजबूत पैकेट ( आप चाहें तो अपने नाम की ब्राडिंग वाली पैकेट्स की छपाई करा सकते हैं। इससे आपके व्यवसाय को मजबूती मिलेगी, यह हमारा सिर्फ एक सुझाव है।)

व्यवसाय संचालित करने सम्बन्धित कानूनी आवश्यकतायेः-

कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति किसी भी व्यवसाय को प्रारम्भ करने से पहले उस ब्यवसाय से सम्बन्धित सारी विधिक प्रक्रियाओं को पूरा कर लेना आवश्यक समझता है जिससे आने वाले समय में किसी भी प्रकार की असुविधा, झंझट या समस्या से बचा जा सके। अतः इस बात को ध्यान में रखकर आप निम्नलिखित आवश्यकताओं को पूरा कर लें-
1- सर्वप्रथम अपने व्यवसाय का उद्योग आधार डाट काम में पंजीयन करवा लें या स्वयं कर लें। यह पंजीकरण पूर्णतया निःशुल्क है।
2- जी0 एस 0 टी0 सम्बन्धित सारी आवश्यकताओं को पूरा कर लें।
3- विक्रय हेतु पक्की रसीद बनवा लें ताकि लेन-देन का हिसाब-किताब पक्का रहे।

सेवईं एवं नूडल्स निर्माण करने की विधि एवं प्रक्रियाः-

सबसे पहले हम सेवईंयों को बनाने की बात करें तो इसके लिये हमको सबसे छोटे दाने वाली रवा और पानी की आवश्यकता पड़ती है। थोड़ा सा पानी रवा में डालकर कुछ इस प्रकार गूँथ लेते है कि मुट्ठियाँ भींचते समय यह भुरभुरे ढेले का आकार पकड़ ले। इसके बाद हम गुथे हुए रवा को सेवईं एवं नूडल्स मेकिंग मशीन के पास ले जाकर बने हुए निर्धारित स्थान पर हाथ से ही डालना शुरु कर देत हैं। इससे ठीक पहले हमे जिस आकार की सेवईंयाँ प्राप्त करनी हो उस आकार की डाई मशीन में कस लें फिर डाई के नीचे कोई थाली या प्लास्टिक के पत्तल लगा दें ताकि जो भी सेवईयाँ बनकर निकलें उनको आसानी से रखा जा सके। यदि मशीन की बात करें तो यह मशीन कम खर्चे मे आसानी से बाजारों में उपलब्ध है या गूगल में सर्च करके आनलाईन खरीददारी भी कर सकते हैं। तैयार सेवईयाँ जब अपेक्षित लम्बाई की हो जाँय तो कैंची की सहायता से उन्हें काट-काट कर पत्तल या थाली में बिछाते रहे। सेवईयाँ बनते समय आप यह पायेंगे कि यह सेवईयाँ बहुत ही कम समय में ( यदि सुबह के समय बनाया जाय तो दोपहर तक बाजार में बिकने के लिये तैयार हो जाती है।) सूखकर रेडी टू यूज हो जाती हैं। बस इन्हें निर्मित करने के बाद थोड़ी सी धूप की आवश्यकता होगी या इन्हें सुखाने के लिये छाये में ही पंखे की सहायता ली जा सकती है। सूख जाने के पश्चात इनकी पैकेजिंग पैकेटों में करके आप स्थानीय बाजारों में सम्बन्धित प्रतिष्ठानों पर पहुँचा करके इनकी बिक्री करा सकते हैं और अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं।

स्मार्ट आइडियाः- हमारे समाज में यह कहावत शुरु से चलती चली आ रही है कि जहाँ चाह है, वहाँ राह है। बस हमको खुद पर भरोसा करना सीखना होगा और कुछ कर दिखाने की तमन्ना विकसित करनी होगी जिससे हम खुद तो आत्मनिर्भर बने ही दूसरे को भी इस कदर प्रेरित करें कि वह भी अपने पैरों पर खड़ा हो सके। हमारे इस प्रयास से जहाँ स्वरोजगार को बढावा मिलेगा वहीं बड़े शहरों की तरफ पलायन होते युवाओं के कदमों को रोका जा सकेगा। इन छोटे-छोटे लघु एवं कुटीर उद्योगों के माध्यम से हम मेक इन इण्डिया कार्यक्रम में अनूठी पहल कर सकते हैं।

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