Wire Nail Manufacturing Business In Hindi

वायर नेल्स मेकिंग बिज़नेस : लोहे की कील बनाने का लघु उद्योग

मित्रवर,
लोहे की कील एक ऐसी वस्तु है जिसका उपयोग हर जगह किया जाता है, चाहे फर्नीचर का काम हो या कोई घर बनाना हो या किसी देवी-देवता का चित्र टांगना हो, दीवार घड़ी टाँगना हो, कपड़ा टाँगने की खूँटियाँ टांगनी हो हमें बरबस लोहे की कील याद आ ही जाती है। ग्रामीण अंचलों में शादी-विवाह या अनुष्ठान आदि अवसरों पर रंग-बिरंगी झण्डियाँ टांगने हेतु स्थायी और अस्थायी तौर पर लोहे की कीलों का लोगों के द्वारा बहुतायत प्रयोग किया जाता है। बाजारों में नाई की दुकानों पर बड़े-बड़े आईनों को टांगने के लिये लोहे की कीलों का धड़ल्ले से प्रयोग किया जाता है।  लोहे की कील बाजार में खूब बिकने वाली सामग्री है, तथा इसका उपयोग देश के हर कोने में किया जाता है, जल्दी ख़राब न होने के कारण इस व्यवसाय में नुकंसान की सम्भावना नहीं के बराबर रहती है। लोहे की कीलें बनाना एक आसान व सरल कार्य है। साथ ही साथ इसकी मांग समाज में हमेशा बनी रहती है। इसका कारण यह है कि भारत एक ऐसा देश है जहाँ जनसंख्या निरन्तर बढ़ती रहती है और लोग अपने लिये घरों का निर्माण कराते ही रहते हैं। ऐसी दशा में लोहे की कीलों की मांग में कमी आना अपने आप में नामुमकिन सा लगता है।

आज इस लेख के माध्यम से हम सभी जान पायेंगे कि किस प्रकार से हम लोहे की कील बनाने के एक छोटे से व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं?

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सबसे पहले हम बात करते हैं लोहे की कील बनाने के रॉ मैटेरियल की
हमारे देश  भारत में दो जगह लोहे का वायर बनाया जाता है जिसमें पहला है- रायपुर (छत्तीसगढ़)  और दूसरा है- दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल)।  इसके अलावा देश के कोने-कोने में इसके होलसेलर्स हैं जो अत्यन्त सस्ते दर पर लोहे की कील बनाने का कच्चा माल बड़ी आसानी से उपलब्ध करा देते हैं। इसके अतिरिक्त आप गूगल में सर्च करके आनलाईन माध्यम से कच्चे माल की खरीददारी कर सकते हैं परन्तु यदि हम सस्ते दर की बात करें तो हमे कच्चा माल  दुर्गापुर एवं रायपुर में सबसे सस्ता मिल जाता है।

लोहे की कीलों का व्यवसाय सम्बन्धी कानूनी प्रक्रियाः-

लोहे की कीलों का निर्माण लघु उद्योग स्थापित करने से पहले सावधान और जागरुक लोग उस व्यवसाय से सम्बन्धित जो भी कानूनी आवश्यकताएँ होती हैं उनको पूरा कर लेते हैं जिससे आगे चलकर उनके मार्ग में किसी प्रकार की कोई समस्य़ा न आये।

इसके लिये आवश्यक है कि कीलों का कारखाना खोलने से पहले आपको अपने व्यवसाय का जरुरी सरकारी रजिस्ट्रेशन करवा लेंना चाहिये। इससे आपको अनेक प्रकार के लाभ मिलते हैं क्योंकि यह सरकार का नियम तो है ही साथ ही साथ आपको उन सभी सरकारी सुविधाओं का भी लाभ मिलता है जो किसी भी व्यक्ति के द्वारा लघु एवं कुटीर उद्योग स्थापित करने के प्रोत्साहन स्वरुप मिलती है। जैसे लघु उद्योग की सब्सिडी, बैंक लोन, इन्श्योरेन्स की सुविद्या इत्यादि।

लोहे की कील के उद्योग का रजिस्ट्रेशन निम्नलिखित तरीके से होता है।

1. उद्योग आधार में पंजीयन (यह सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध है तथा बिल्कुल मुफ्त है)
2. वस्तु एवं सेवा कर पंजीकरण( गुड्स एवं सर्विस टैक्स रजिस्ट्रेशन) यह रजिस्ट्रेशन किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट की सहायता
से करवाया जा सकता है जो बड़ी सरलता से हो जाता है।
3. यदि आप इस व्यवसाय की शुरुआत शहर में करना चाहते हैं तो इसके लिये सक्षम प्राधिकारी से शॉप एक्ट लाइसेंस
आवश्यकता पड़ेगी और यदि ग्राम पंचायत स्तर पर इसकी शुरुआत करना चाहते हैं तो इसके लिये आपको ब्लॉक या
ग्राम पंचायत से एक नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (अनापत्ति प्रमाणपत्र) प्राप्त करना होगा जिसका खर्च लगभग 800
रुपये आता है। इसके पश्चात आप निश्चिन्त होकर अपने व्यवसाय का प्रारम्भ कर सकते हैं।

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वायर कील बनाने का तरीका

लोहे के वायर(तार) से कील बनाने का तरीका एवं मशीनरीः-
वायर कील बनाने के लिए हमें 3 मशीन की जरुरत पड़ती है।

1- वायर नेल्स मेकिंग मशीन            2- नेल्स पोलिश मशीन           3- ग्राइंडर मशीन

लोहे की कीलों को तैयार करने के लिये सबसे पहले वायर नेल्स मशीन 3 फेज बिजली पर चलाया जाता है। मशीन को चालू करने से पहले, वायर का एक छोर मशीन के अंदर फिट कर दिया जाता है, और मशीन चालू करते ही मशीन कीलों
(नेल्स) की उत्पादन प्रारम्भ कर देती है। यह मशीन 1 दिन में कम से कम 6०० किलोग्राम लोहे के कीलों का निर्माण कर देती है। कीलों का निर्माण हो जाने के पश्चात् कीलों में चमक लाने के लिये नेल्स पोलिश मशीन के अंदर कीलों को डाल  दिया जाता है और इसके अंदर लकडी के बूरादे या लकड़ी की भूसी का उपयोग कील को चमकाने के लिए किया जाता है। यह एक आसान तरीका है जिससे कीलों की बनावट नयी हो जाती है। इस मशीन को मैनुअल या आटोमेटिक दोनों रूप में अपनी सुविधानुसार उपयोग किया जा सकता है।

इसके बाद ग्राइंडर मशीन कील के ऊपरी छोर पर बने तेज़ धार के दोनों सिरों से (अगर धार ठीक से न बना हो ) उसे बनाने का काम करता है,  हालाँकि इसका उपयोग कम ही होता है, लेकिन कभी-कभी यह बड़ा आवश्यक भी होता है।

इस व्यवसाय को शुरु करने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर बैंक से लोन लिया जा सकता है तथा कुछ राज्यों में सब्सिडी की भी व्यवस्था राज्य सरकारों ने लघु उद्योग को बढ़ावा देने के लिए किया है। कील बनाने की कुल मशीन की कीमत 5 लाख रुपये तक आती है तथा रॉ मैटेरियल 35 से 37 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बाजार में उपलब्ध है।

हमारे रिसर्च के अनुसार : 1 किलोग्राम कील बनाने का खर्च 37 से 39 रुपये आता है जबकि इसका बाजार मूल्य 47 रुपये लगभग होता है।  इस व्यवसाय में 5 से लेकर 9 रुपये प्रति किलोग्राम का लाभ हो सकता है एवं महीने की 80 हजार रुपये तक की आमदनी बड़ी आसानी से की जा सकती है।

स्मार्ट आइडियाः- दोस्तों परिश्रम वह पारस पत्थर है जो लोहे को भी छूकर सोना बनाने का सामर्थ्य रखता है। मेरे कहने का अर्थ यह है कि हम धैर्य़पूर्वक किसी भी कार्य को निष्ठा और ईमानदारी से समर्पण भावना के साथ शुरु करके बड़े ही कम समय में सफलता की नयी ऊँचाइयों को प्राप्त कर सकते हैं साथ ही साथ अन्य लोगों को भी ऐसे कार्यो को करने की प्रेरणा दे सकते है और इस प्रकार राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दे सकते हैं।

नोट : सारा इनफार्मेशन एजुकेशनल पर्पज के लिए बनाया गया है। अतः आपसे निवेदन है की स्वयं भी इसके ऊपर रिसर्च करने के बाद ही व्यवसाय शुरु करें।

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4 thoughts on “Wire Nail Manufacturing Business In Hindi”

  1. Suprv bhai… Thank u for this video…. I m startup…

    Koi acche business की talash m hu… जो rajasthan के kota m chl सके… 10 लाख tk का…

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